जीना अपने ही में / सुमित्रानंदन पंत (फोटो सौजन्य लक्ष्मीधर मालवीय) जीना अपने ही में एक महान कर्म है जीने का हो सदुपयोग यह मनुज धर्म है अपने ही में रहना एक प्रबुद्ध कला है जग के हित रहने में सबका सहज भला है जग का प्यार मिले जन्मों के पुण्य चाहिए जग जीवन...