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    सूनी घाटी का सूरज / श्रीलाल शुक्‍ल

    सूनी घाटी का सूरज : श्रीलाल शुक्‍ल —————————————– राकी गर्ग की एक समीक्षात्‍मक टिप्‍पणी —————————————————- राग -दरबारी जैसे महान उपन्यास के लेखक श्री लाल शुक्ल का ये महतवपूर्ण उपन्यास सूनी घाटी का सूरज पुस्तक प्रेमियों की दृष्टि से इतना उदासीन कैसा रहा मुझे समझ नही आया। यह एक उपन्यास न होकर एक आत्मकथा अधिक लगता...

    बूढ़ी डायरी / अशोक जमनानी

    पुस्तक समीक्षा- बूढ़ी डायरी, लेखक – अशोक जमनानी Ashok Jamnani —————————————————————————- “निर्धनता को शापित एक समाज की समृद्धि का अभिलेख – बूढ़ी डायरी”   भारत क्या है? इस प्रश्न पर विवादों का कोई अंत नहीं है। एक वर्ग है जो भारत को यूरोप की तरह अनेक संस्कृतियों का एक बेमेल समुच्च्य मानता है। उनके मत...

    खम्मा / अशोक जमनानी

    खम्मा / अशोक जमनानी खम्मा पर डॉ आईदान सिंह भाटी जी के विचारडॉ आईदान सिंह भाटी हमारे देश के शीर्षस्थ साहित्यकारों में शुमार होते हैं। इस वर्ष उन्हें राजस्थानी भाषा के लिए केन्द्रीय साहित्य अकादमी की ओर से सम्मानित किया गया है। उन्होंने खम्मा पर अपनी राय प्रेषित की है जिसे आपके साथ साझा कर...

    मैं एक हरिण और तुम इंसान / सुरेन्‍द्र डी सोनी

    हरिण-मन की  दौड़ की कविता -मायामृग की समीक्षा मैं एक हरिण और तुम इंसान/कविता संग्रह/सुरेन्‍द्र डी सोनी/संस्‍करण 2013/पेपरबैक/पृष्‍ठ 144/मूल्‍य 70.00 रुपये मात्र/बोधि प्रकाशन, जयपुर/आवरण चित्र: कुंअर रवीन्‍द्रएक पाठकीय दृष्टि हरिण दौड़ता है…कभी बेलाग…कभी बेतहाशा..। कभी कुलांचे भरता अपनी मौज में, कभी प्राण बचाने को प्राण निचोड़कर पैरों में लिए हुए..। दौड़ना उसकी नियति है, विवशता...

    मौन मगध में (Maun Magadh Me) / राजीव रंजन प्रसाद (Rajeev Ranjan Prasad)

    मौन मगध में: उस इतिहास के खिलाफ जो व्रेपर में लपेट कर मुहैय्या कराया जाता है – विश्वदीपक ‘तनहा’ ———- इतिहास बुद्धिजीवियों के ड्राईंगरूम में सजाया कोई फ्लावर-पॉट, कोई गुलदस्ता नहीं, जिसे देखने, सराहने या कोसने का पहला और आखिरी हक़ सिर्फ़ सेल्फ़ में रखी चंद किताबों का हो। यह एक बहती हुई नदी है,...

    आमचो बस्तर (Aamcho Bastar) / राजीव रंजन प्रसाद (Rajeev Ranjan Prasad)

    भारत के आदिवासी इलाकों, वहाँ के जन जीवन, लोक कलाओं, संगीत, नृत्‍य, समस्‍याओं और अकूत नैसर्गिक सौंदर्य के बारे में हमेशा बहुत कुछ जानने की इच्‍छा रही है। एक दो यात्राएं करने का मौका भी मिला है लेकिन यह जानना या भीतर उतरना आम तौर पर बाहरी या औपचारिक ही रहा है। कभी दो चार...
    रेप तथा अन्य कहानियां / सरोजनी साहू

    रेप तथा अन्य कहानियां / सरोजनी साहू

    रेप तथा अन्य कहानियां / सरोजनी साहू: रेप से बड़ा शायद ही कोई अपमान हो. यह हर उस समाज के मुहँ पर करारा तमाचा है जो सभ्य होने का दावा करता है. पर क्या रेप केवल एक अनजान आदमी के हाथों ही होता है? क्या रेप केवल शरीर का ही हो सकता है? प्रस्तुत कहानियां...
    मेरे राम मेरी रामकथा / नरेन्द्र कोहली

    मेरे राम मेरी रामकथा / नरेन्द्र कोहली

    रामकथा आदर्श जीवन की संपूर्ण गाइड है। राम भारतवर्ष के प्राण हैं। वे भारत के रोम-रोम में बसे हैं। यही कारण है कि उनका अनादर देश बर्दाश्त नहीं कर सकता। ‘मेरे राम मेरी रामकथा’ लिखने से पूर्व प्रख्यात लेखक नरेन्द्र कोहली राम चरित्र पर एक वृह्द उपन्यास लिख चुके हैं, जिसे खूब सराहा गया। यह...
    किताबें - कितनी जरूरी

    किताबें – कितनी जरूरी

    किताबे मानवजाति द्वारा की गयी सबसे बेहतरीन खोज है | सभ्यताओं को दिया गया सबसे बेहतरीन तोहफा है, ऐसा मेरा मानना है | मानना क्या दृढ विश्वास है | जितना सब कुछ हम पढने की आदत डालकर सीख सकते हैं उतना सिखाना तो किसी भी संस्थान के बस का नहीं | मेरी अपनी ज़िन्दगी में...
    एक गधे की आत्मकथा / कृश्न चन्दर

    एक गधे की आत्मकथा / कृश्न चन्दर

    एक गधे की आत्मकथा / कृश्न चन्दर “एक गधे की आत्मकथा” कृश्न चन्दर जी की बहुत ही सधी हुई व्यंग्य कृति है| आप पूरी पुस्तक पढ़ डालिये, फिर भी आप इसी पसोपेश में रहेंगे कि ये आदमी के रूप में गधा है या गधे के रूप में आदमी| इस संग्रह में उन्होने गधे के माध्यम...

    जीना अपने ही में / सुमित्रानंदन पंत

      जीना अपने ही में / सुमित्रानंदन पंत (फोटो सौजन्य लक्ष्मीधर मालवीय) जीना अपने ही में एक महान कर्म है जीने का हो सदुपयोग यह मनुज धर्म है अपने ही में रहना एक प्रबुद्ध कला है जग के हित रहने में सबका सहज भला है जग का प्यार मिले जन्मों के पुण्य चाहिए जग जीवन...