शेष प्रश्न(अंतिम प्रश्न) शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के सभी उपन्यासों से सबसे मौलिक और अभिनव है. जब यह उपन्यास पहली बार 1931 में प्रकाशित किया गया था तो रूढ़िवादी समाज में अपने व्यापक,स्वतंत्र और निर्भीक विचारो से हलचल मचा दिया था.
नायिका, कमल, उस समय के लिए असाधारण है और आज भी उतनी ही प्रासंगिक है . वह स्वयं के द्वारा यात्रा करती है, अकेले रहती है, विभिन्न पुरुषों के साथ संबंध है, गरीबी से पीड़ित है, पर अपने स्वायत्तता और अलग पहचान का दावा है. इस प्रक्रिया में, मुख्य धारा के समाज से अलग रहती है , जहां वह जीवन के फ्रेम. कमल के माध्यम से, शरतचंद्र भारतीय परंपरा, विवाह, प्रेम का मतलब और राष्ट्रीयता और नारीत्व के मानदंडों पर सवाल उठाते है. शेष प्रश्न आज के समय और समाज के लिए भी उतना ही सार्थक है जितना पहले.
‘शेष प्रश्न’ शरतचंद्र की उत्कृष्ट रचनाओं में से एक है| इस उपन्यास में तथाकथित सभ्य समाज से तिरस्कृत एक नारी की व्यथा को अत्यंत रोचक और मार्मिक शैली में प्रस्तुत किया गया है|
कभी-कभी जो व्यवहार और आचार-विचार हम किसी के प्रति अपनाते हैं, परिस्थियां बदल जाने पर हमें अपने ही उस व्यवहार और आचार-विचार पर लज्जित होना पड़ता है| इसे हे शेष प्रश्न की कथावस्तु में रोचकता के साथ प्रस्तुत किया गया है|
‘शेष प्रश्न’ सभी उम्र के पाठकों के लिए उपयुक्त है और यह उपन्यास आपके जीवन , विचारो को बदलने की ताकत रखता है.
-SV