Recent Comments

    Archives

    चिरागों की रात - अमृता प्रीतम

    चिरागों की रात – अमृता प्रीतम

      चिरागों की रात   “मोहब्बत एक ही खुदाई कानून है| और जितने भी हुक्म आपको दिए गए हैं, मैं वह सारे उतारने आया हूँ, आपको स्वतंत्र करने के लिए…..” -          मीरदाद (किताब-ए-मीरदाद से)   लेखिका अमृता प्रीतम द्वारा संकलित या रचित यह पुस्तक (चिरागों की रात) उनकी एक ऐसी...
    रेप तथा अन्य कहानियां / सरोजनी साहू

    रेप तथा अन्य कहानियां / सरोजनी साहू

    रेप तथा अन्य कहानियां / सरोजनी साहू: रेप से बड़ा शायद ही कोई अपमान हो. यह हर उस समाज के मुहँ पर करारा तमाचा है जो सभ्य होने का दावा करता है. पर क्या रेप केवल एक अनजान आदमी के हाथों ही होता है? क्या रेप केवल शरीर का ही...
    मेरे राम मेरी रामकथा / नरेन्द्र कोहली

    मेरे राम मेरी रामकथा / नरेन्द्र कोहली

    रामकथा आदर्श जीवन की संपूर्ण गाइड है। राम भारतवर्ष के प्राण हैं। वे भारत के रोम-रोम में बसे हैं। यही कारण है कि उनका अनादर देश बर्दाश्त नहीं कर सकता। ‘मेरे राम मेरी रामकथा’ लिखने से पूर्व प्रख्यात लेखक नरेन्द्र कोहली राम चरित्र पर एक वृह्द उपन्यास लिख चुके हैं,...

    गोदान – प्रेमचन्द

            गोदान प्रेमचन्द हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार हैं और उनकी अनेक रचनाओं की गणना कालजयी साहित्य के अन्तर्गत की जाती है। ‘गोदान’ तो उनका सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है ही, ‘गबन’, ‘निर्मला’, ‘रंगभूमि’, ‘सेवा सदन’ तथा अनेकों कहानियाँ हिन्दी साहित्य का अमर अंग बन गई हैं। इनके अनुवाद भी भारत की सभी प्रमुख तथा अनेक विदेशी भाषाओं में हुए हैं। इन रचनाओं में उन्होंने जो समस्याएँ उठाईं तथा स्त्री-पुरूषों के चरित्र खींचे, वे आज भी उसी प्रकार सार्थक हैं जैसे वे अपने समय थे और भविष्य में बने रहेंगे। भारतीय समाज के सभी वर्गों का चित्रण बहुत मार्मिक है विशेषकर ग्रामीण किसानों का, जिनके साथ वे एक प्रकार से आत्मसात ही हो गये थे। ‘गोदान’ प्रेमचन्द का सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपन्यास है। इसमें ग्रामीण समाज के अतिरिक्त नगरों के समाज और उनकी समस्याओं का उन्होंने बहुत मार्मिक चित्रण किया है।   यदि हमें तत्कालीन समय के भारत वर्ष को समझना है तो...
    एक गधे की आत्मकथा / कृश्न चन्दर

    एक गधे की आत्मकथा / कृश्न चन्दर

    एक गधे की आत्मकथा / कृश्न चन्दर “एक गधे की आत्मकथा” कृश्न चन्दर जी की बहुत ही सधी हुई व्यंग्य कृति है| आप पूरी पुस्तक पढ़ डालिये, फिर भी आप इसी पसोपेश में रहेंगे कि ये आदमी के रूप में गधा है या गधे के रूप में आदमी| इस संग्रह...
    Latest entries

    आशापूर्णा देवी

    1. जीवन परिचय   जन्म : आशापूर्णा देवी का जन्म 8 जनवरी, 1909 को पश्चिमी बंगाल के कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता)  में हुआ था। जीवन परिस्थितियां/पारिवारिक जीवन : आशापूर्णा जी का परिवार एक मध्यमवर्गीय परिवार था। इनके परिवार में पिता, माता और तीन भाई थे। इनके पिता एक अच्छे चित्रकार थे और इनकी माता की बांग्ला...

    स्मृति – काव्य संग्रह / अभिषेक अवस्थी

    “स्मृति” युवा कवि और पेशे से संगीतज्ञ श्री अभिषेक अवस्थी का पहला काव्य संग्रह है। पुस्तक का नाम कवि ने स्मृति अपनी बहन के नाम पर रखा है साथ उनकी कई रचनाएँ विद्द्यालयकाल मे लिखी ही हैं जो कवि की स्मृतियों से जुड़ी हुई हैं। “स्मृति” मे अभिषेक अवस्थी ने अपने मन की भावनाएं बहुत...

    सूनी घाटी का सूरज / श्रीलाल शुक्‍ल

    सूनी घाटी का सूरज : श्रीलाल शुक्‍ल —————————————– राकी गर्ग की एक समीक्षात्‍मक टिप्‍पणी —————————————————- राग -दरबारी जैसे महान उपन्यास के लेखक श्री लाल शुक्ल का ये महतवपूर्ण उपन्यास सूनी घाटी का सूरज पुस्तक प्रेमियों की दृष्टि से इतना उदासीन कैसा रहा मुझे समझ नही आया। यह एक उपन्यास न होकर एक आत्मकथा अधिक लगता...

    माखनलाल चतुर्वेदी

    1. जीवन परिचय जन्म : श्री माखनलाल चतुर्वेदी जी का जन्म मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के बाबई नामक गाँव में 4 अप्रैल, 1889 को हुआ था। जीवन परिस्थितियां/पारिवारिक जीवन : माखनलाल चतुर्वेदी जी का बचपन संघर्षमय था। बचपन में ये काफ़ी रूग्ण और बीमार रहा करते थे। इनका परिवार राधावल्लभ सम्प्रदाय का अनुयायी था। नृसिंह...

    बूढ़ी डायरी / अशोक जमनानी

    पुस्तक समीक्षा- बूढ़ी डायरी, लेखक – अशोक जमनानी Ashok Jamnani —————————————————————————- “निर्धनता को शापित एक समाज की समृद्धि का अभिलेख – बूढ़ी डायरी”   भारत क्या है? इस प्रश्न पर विवादों का कोई अंत नहीं है। एक वर्ग है जो भारत को यूरोप की तरह अनेक संस्कृतियों का एक बेमेल समुच्च्य मानता है। उनके मत...

    खम्मा / अशोक जमनानी

    खम्मा / अशोक जमनानी खम्मा पर डॉ आईदान सिंह भाटी जी के विचारडॉ आईदान सिंह भाटी हमारे देश के शीर्षस्थ साहित्यकारों में शुमार होते हैं। इस वर्ष उन्हें राजस्थानी भाषा के लिए केन्द्रीय साहित्य अकादमी की ओर से सम्मानित किया गया है। उन्होंने खम्मा पर अपनी राय प्रेषित की है जिसे आपके साथ साझा कर...

    मैं एक हरिण और तुम इंसान / सुरेन्‍द्र डी सोनी

    हरिण-मन की  दौड़ की कविता -मायामृग की समीक्षा मैं एक हरिण और तुम इंसान/कविता संग्रह/सुरेन्‍द्र डी सोनी/संस्‍करण 2013/पेपरबैक/पृष्‍ठ 144/मूल्‍य 70.00 रुपये मात्र/बोधि प्रकाशन, जयपुर/आवरण चित्र: कुंअर रवीन्‍द्रएक पाठकीय दृष्टि हरिण दौड़ता है…कभी बेलाग…कभी बेतहाशा..। कभी कुलांचे भरता अपनी मौज में, कभी प्राण बचाने को प्राण निचोड़कर पैरों में लिए हुए..। दौड़ना उसकी नियति है, विवशता...

    मौन मगध में (Maun Magadh Me) / राजीव रंजन प्रसाद (Rajeev Ranjan Prasad)

    मौन मगध में: उस इतिहास के खिलाफ जो व्रेपर में लपेट कर मुहैय्या कराया जाता है – विश्वदीपक ‘तनहा’ ———- इतिहास बुद्धिजीवियों के ड्राईंगरूम में सजाया कोई फ्लावर-पॉट, कोई गुलदस्ता नहीं, जिसे देखने, सराहने या कोसने का पहला और आखिरी हक़ सिर्फ़ सेल्फ़ में रखी चंद किताबों का हो। यह एक बहती हुई नदी है,...

    आमचो बस्तर (Aamcho Bastar) / राजीव रंजन प्रसाद (Rajeev Ranjan Prasad)

    भारत के आदिवासी इलाकों, वहाँ के जन जीवन, लोक कलाओं, संगीत, नृत्‍य, समस्‍याओं और अकूत नैसर्गिक सौंदर्य के बारे में हमेशा बहुत कुछ जानने की इच्‍छा रही है। एक दो यात्राएं करने का मौका भी मिला है लेकिन यह जानना या भीतर उतरना आम तौर पर बाहरी या औपचारिक ही रहा है। कभी दो चार...
    किताबें - कितनी जरूरी

    किताबें – कितनी जरूरी

    किताबे मानवजाति द्वारा की गयी सबसे बेहतरीन खोज है | सभ्यताओं को दिया गया सबसे बेहतरीन तोहफा है, ऐसा मेरा मानना है | मानना क्या दृढ विश्वास है | जितना सब कुछ हम पढने की आदत डालकर सीख सकते हैं उतना सिखाना तो किसी भी संस्थान के बस का नहीं | मेरी अपनी ज़िन्दगी में...

    राग दरबारी- श्री लाल शुक्ल

    राग दरबारी श्री लाल शुक्ल, उनकी सामाजिक और राजनीतिक व्यंग्य के लिए जाना जाता है. इस उपन्यास के लिए 1970 में सबसे बड़े भारतीय साहित्यिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया. राग दरबारी भारतीय समाज आजादी के बाद में नैतिक मूल्यों में क्षय पर एक व्यंग्य नज़र लेता है. यह राजनीतिज्ञों, व्यवसायियों, अपराधियों, और पुलिसकर्मियों के...

    शेष प्रश्न(अंतिम प्रश्न) -शरतचंद्र चट्टोपाध्याय

      शेष प्रश्न(अंतिम प्रश्न) शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के सभी उपन्यासों से सबसे मौलिक और अभिनव है. जब यह उपन्यास पहली बार 1931 में प्रकाशित किया गया था तो रूढ़िवादी समाज में अपने व्यापक,स्वतंत्र और निर्भीक विचारो से हलचल मचा दिया था. नायिका, कमल, उस समय के लिए असाधारण है और आज भी उतनी ही प्रासंगिक है...